देहरादून: नशे के कारोबार को सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बताते हुए एडीजी कानून-व्यवस्था वी. मुरुगेशन ने युवाओं को नशे से बचाने और इस अवैध कारोबार के खिलाफ समाज की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार में युवाओं को पहले इसकी लत लगाने और फिर इसी के जरिये मुनाफा कमाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

नशे के नेटवर्क को लेकर जताई चिंता

पुलिस लाइन देहरादून में नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वी. मुरुगेशन ने कहा कि नशे का कारोबार केवल अवैध कमाई तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क युवाओं को नशे की गिरफ्त में लेकर समाज और देश को नुकसान पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।

एडीजी ने नशे के प्रसार को संभावित प्रॉक्सी वार के नजरिये से देखने की जरूरत भी बताई। उन्होंने संकेत दिया कि इस चुनौती से निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ परिवारों, शिक्षण संस्थानों और समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

लत लगाकर बाजार बढ़ाने की रणनीति

वी. मुरुगेशन के मुताबिक, नेटवर्क मार्केटिंग की तर्ज पर नशे का कारोबार फैलाने में पहले लोगों को इसकी गिरफ्त में लाया जा सकता है। इसके बाद उनकी निर्भरता से नशीले पदार्थों की मांग बढ़ती है और अवैध कारोबार से जुड़े लोग मुनाफा कमाते हैं।

युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और भविष्य पर पड़ सकता है। इसका नुकसान केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और पूरे समाज को भी प्रभावित करता है।

अफीम आधारित अर्थव्यवस्थाओं का भी किया उल्लेख

अपने संबोधन में एडीजी ने अफीम आधारित अर्थव्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए मादक पदार्थों के कारोबार के आर्थिक पहलुओं पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नशे की तस्करी को केवल स्थानीय अपराध के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क, आर्थिक हितों और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

प्रॉक्सी वार के तौर पर नशे के इस्तेमाल की आशंका

एडीजी ने नशे के प्रसार को प्रॉक्सी वार के नजरिये से देखने की जरूरत पर जोर दिया। प्रॉक्सी वार में सीधे युद्ध के बजाय अन्य माध्यमों से विरोधी पक्ष को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

नशे के कारण युवाओं के स्वास्थ्य, क्षमता और सामाजिक ढांचे पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए उन्होंने इस समस्या से गंभीरता से निपटने की आवश्यकता बताई। इसके लिए तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, अवैध कमाई के स्रोतों की जांच करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयासों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज की भागीदारी जरूरी

नशे की समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ जन-जागरूकता को भी महत्वपूर्ण बताया गया। परिवारों, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

नशे की मांग कम करने, समय रहते युवाओं की मदद करने और तस्करी से जुड़े अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस और समाज के बीच समन्वय आवश्यक है।

पांच पुलिसकर्मी बाइक से गुजरात रवाना

नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान के तहत पांच पुलिसकर्मियों को बाइक से गुजरात के लिए रवाना किया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें पुलिस लाइन देहरादून से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस पहल का उद्देश्य नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।

संदेश: नशे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए कानून-व्यवस्था की कार्रवाई, जागरूकता और सामाजिक सहयोग—तीनों जरूरी हैं।