विशेषज्ञ बोले—इलाज के बाद कैंसर की वापसी रोकने में मदद कर सकती हैं नई थैरेपी; रूस की Enteromix अभी शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल के चरण में
कैंसर के इलाज में वैक्सीन आधारित थैरेपी को भविष्य की एक महत्वपूर्ण संभावना माना जा रहा है। लेकिन क्या नई कैंसर वैक्सीन स्वस्थ लोगों को कैंसर होने से बचाएगी, या पहले से कैंसर का इलाज करा चुके मरीजों में बीमारी की वापसी रोकने में मदद करेगी? इसका जवाब वैक्सीन के प्रकार और उसके वैज्ञानिक परीक्षणों पर निर्भर करता है।
केरल स्टेट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के रिसर्च सेल के संयोजक और IMA कोचीन की साइंटिफिक कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने सितंबर 2025 में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी सोसायटी (GIOS) के दूसरे वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा था कि नई थेराप्यूटिक कैंसर वैक्सीन का उद्देश्य स्वस्थ लोगों में कैंसर की शुरुआत रोकना नहीं, बल्कि कैंसर का इलाज करा चुके मरीजों में उसकी पुनरावृत्ति रोकने में मदद करना है। ये वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उनसे लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने की दिशा में विकसित की जा रही हैं।
क्या होती हैं थेराप्यूटिक कैंसर वैक्सीन?
कैंसर के संदर्भ में ‘वैक्सीन’ शब्द का अर्थ हमेशा सामान्य टीकाकरण जैसा नहीं होता। कुछ वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले संक्रमणों से बचाव करती हैं, जबकि थेराप्यूटिक कैंसर वैक्सीन उन लोगों के उपचार में मदद करने के लिए बनाई जाती हैं जिन्हें पहले से कैंसर है या जिनमें इलाज के बाद बीमारी लौटने का खतरा है।
इनमें से कुछ वैक्सीन ट्यूमर में मौजूद विशेष प्रोटीन या एंटीजन की पहचान कराकर प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध सक्रिय करने का प्रयास करती हैं। व्यक्तिगत नियोएंटीजन थैरेपी में मरीज के ट्यूमर की विशेषताओं के आधार पर उपचार तैयार किया जा सकता है। हालांकि, हर वैक्सीन हर प्रकार के कैंसर या हर मरीज पर समान प्रभाव नहीं डालती।
रूस की Enteromix वैक्सीन कितनी प्रभावी है?
रूस में विकसित की जा रही Enteromix वैक्सीन को लेकर 2025 में काफी चर्चा हुई थी। सोशल मीडिया और कुछ खबरों में इसके 100 प्रतिशत प्रभावी होने के दावे किए गए। लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर इस दावे को प्रमाणित मानव परीक्षणों का स्थापित नतीजा नहीं माना जा सकता।
रूस के नेशनल मेडिकल रिसर्च रेडियोलॉजिकल सेंटर के अनुसार, Enteromix चार गैर-रोगजनक वायरसों के संयोजन पर आधारित एक प्रायोगिक ऑन्कोलिटिक उपचार है। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के साथ शरीर की कैंसर-विरोधी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करना है। यह व्यक्तिगत नियोएंटीजन वैक्सीन से अलग तकनीक है।
रूसी विज्ञान अकादमी ने दिसंबर 2024 में इसके प्रथम चरण के क्लिनिकल परीक्षण की शुरुआत की जानकारी दी थी। मई 2026 में ClinicalTrials.gov पर दर्ज अध्ययन के विवरण के अनुसार, इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य इसकी सुरक्षा, सहनशीलता और शरीर में दवा की गतिविधि का मूल्यांकन करना है। यानी शुरुआती चरण में प्राथमिक सवाल यह है कि उपचार कितना सुरक्षित है और मरीज इसे किस तरह सहन करते हैं, न कि यह साबित करना कि वैक्सीन सभी मरीजों को ठीक कर देती है।
रूस के संबंधित संस्थान ने जुलाई 2026 में भी स्पष्ट किया कि Enteromix प्रथम चरण के क्लिनिकल परीक्षण में है और आम लोगों के लिए बिक्री हेतु उपलब्ध नहीं है। संस्थान ने इसके नाम पर पैसे लेकर वैक्सीन उपलब्ध कराने के दावों को धोखाधड़ी से जुड़ा जोखिम बताया है।
फिर 100 प्रतिशत प्रभावकारिता का दावा कहां से आया?
इस दावे को लेकर सबसे महत्वपूर्ण अंतर प्री-क्लिनिकल परीक्षण और मानव क्लिनिकल परीक्षण के बीच है। प्री-क्लिनिकल अध्ययन प्रयोगशाला में कोशिकाओं और पशु मॉडलों पर किए जा सकते हैं। उनके सकारात्मक परिणाम आगे मानव परीक्षण करने का आधार बनते हैं, लेकिन वे अपने आप यह साबित नहीं करते कि किसी उपचार से इंसानों में कैंसर पूरी तरह ठीक हो जाएगा।
AFP की फैक्ट-चेक रिपोर्ट ने भी Enteromix के 100 प्रतिशत प्रभावी होने और इसे कैंसर का प्रमाणित इलाज बताने वाले दावों को उपलब्ध साक्ष्यों से असमर्थित बताया था। जब तक बड़े और पर्याप्त मानव परीक्षणों के नतीजे प्रकाशित नहीं होते तथा नियामक मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इसकी वास्तविक प्रभावकारिता, दीर्घकालिक सुरक्षा और मरीजों के जीवित रहने पर असर को लेकर निर्णायक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
क्या कैंसर से बचाव के लिए कोई वैक्सीन पहले से मौजूद है?
हां। यह समझना जरूरी है कि कैंसर से बचाव करने वाली वैक्सीन पहले से उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, HPV वैक्सीन ह्यूमन पैपिलोमावायरस के उन प्रकारों से बचाव करती है जो सर्वाइकल कैंसर सहित कुछ अन्य कैंसरों का कारण बन सकते हैं। हेपेटाइटिस-B वैक्सीन संक्रमण से बचाव करके लिवर कैंसर का जोखिम कम करने में मदद करती है।
हालांकि, ये वैक्सीन पहले से मौजूद कैंसर का इलाज नहीं करतीं। इसी तरह, कैंसर के इलाज के लिए विकसित की जा रही नई वैक्सीनों को भी बिना पर्याप्त प्रमाण के सभी प्रकार के कैंसर से बचाव करने वाला उपाय नहीं कहा जा सकता।
मरीजों के लिए क्या है जरूरी?
कैंसर वैक्सीन पर हो रहा शोध चिकित्सा विज्ञान के लिए उम्मीद जगाता है, लेकिन फिलहाल इसे मौजूदा प्रमाणित उपचारों का विकल्प मानना उचित नहीं होगा। मरीजों को इलाज, दवा या कीमोथेरेपी बंद करने अथवा किसी प्रायोगिक वैक्सीन के लिए पैसे देने से पहले अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
कैंसर के खिलाफ वैक्सीन आधारित उपचार भविष्य में बीमारी की पुनरावृत्ति रोकने और कुछ मरीजों के उपचार के विकल्प बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन रूस की Enteromix के मामले में ‘100 प्रतिशत सफलता’ का दावा अभी उपलब्ध प्रमाणों से स्थापित नहीं है। इसकी वास्तविक उपयोगिता का आकलन मानव परीक्षणों के नतीजों, दीर्घकालिक फॉलो-अप और नियामक समीक्षा के बाद ही किया जा सकेगा।